लोकभुवर्लोक की 'प्राण-मनस' अवधारणा का क्या अर्थ है?प्राण-मनस अवधारणा का अर्थ है कि भुवर्लोक प्राण (जीवन ऊर्जा) और मन (चेतना) का संगम क्षेत्र है। योग साधक प्राण-नियंत्रण से यहाँ की सिद्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं।#प्राण मनस#भुवर्लोक#वायु पुराण
लोकजनलोक की भूमि कैसी बताई गई है?जनलोक की भूमि जड़ पदार्थ की नहीं, बल्कि चिन्मय तत्त्व की मानी गई है।#जनलोक#भूमि#चिन्मय तत्त्व
श्री रुद्र-कवच-संहिताअमोघ कवच में 'अणोरणीयान्' का क्या तात्पर्य है?इसका अर्थ है वह ईश्वर जो अणु से भी छोटा और सूक्ष्म है, फिर भी अनंत शक्तिशाली है।#अणोरणीयान्#सूक्ष्म#ईश्वर
जीवन एवं मृत्युप्रेत शरीर कैसा होता है?प्रेत-शरीर सूक्ष्म, अदृश्य और 'हस्तमात्र' (एक हाथ बराबर) बताया गया है। यह पिंडदान से निर्मित वासनामय शरीर है जिसमें भूख-प्यास और पीड़ा का अनुभव होता है। यमदूत के पाश से बँधा होने के कारण वापस नहीं लौट सकता।#प्रेत#शरीर#सूक्ष्म