विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में प्रेत-शरीर के स्वरूप का अत्यंत विस्तृत वर्णन है।
सूक्ष्म और अदृश्य — प्रेत-शरीर सांसारिक दृष्टि से अदृश्य होता है। 'प्रेत योनि में आत्माएँ अशरीरी होती हैं, अर्थात उनके पास भौतिक शरीर नहीं होता है।' यह एक सूक्ष्म अस्तित्व है।
पिंडदान से निर्मित देह — गरुड़ पुराण में बताया गया है कि दसवें दिन तक के पिंडदान से प्रेत के विभिन्न अंगों का निर्माण होता है। 'दग्धे देहे पुनर्देहः पिण्डैरुत्पद्यते' — जले शरीर के बाद पिंडों से नई देह। यह 'हस्तमात्र' (एक हाथ के बराबर) बताई गई है।
वासनामय शरीर — यह वासना, कामना और संचित इच्छाओं का शरीर है। इसमें भूख, प्यास, दुख और पीड़ा का अनुभव होता है।
यमदूत के पाश में — प्रेत-शरीर यमदूत के पाश से बँधा होता है। इसी कारण वह अपने पुराने शरीर में प्रवेश नहीं कर सकता।
क्षणिक अस्तित्व — यह शरीर स्थायी नहीं है। उचित संस्कारों के बाद यह विसर्जित हो जाता है और जीव नई यात्रा पर निकलता है।





