विस्तृत उत्तर
वितल लोक से यह सीख मिलती है कि भौतिक ऐश्वर्य, स्वर्ण, सुंदरता और विलासिता बाहर से बहुत दीप्तिमान लग सकते हैं, पर यदि उनमें आध्यात्मिक ज्ञान, वैराग्य और भगवत्प्रेम नहीं है तो वे मोक्ष नहीं दे सकते। वितल लोक अज्ञान, विलासिता और भौतिकता का सघन स्वरूप है। यहाँ भगवान शिव का हाटकेश्वर रूप यह बताता है कि गहनतम भौतिकता और भोग के रसातल में भी ईश्वर की सत्ता और शक्ति का संचार है। जो जीव आध्यात्मिक दृष्टि से शून्य होते हैं, वे हाटक स्वर्ण को आभूषण समझकर विलासिता में उलझ जाते हैं; पर तत्वज्ञानी इसे ईश्वरीय माया का खेल समझकर मोक्ष प्रदाता भगवान के निर्गुण और निराकार स्वरूप की ओर अग्रसर होते हैं।
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