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विस्तृत उत्तर
नन्दी ने यह योग देवताओं, ऋषियों और पितरों की सन्निधि में बताया था। पाठ में सूतजी कहते हैं कि प्राचीनकाल में देवताओं, ऋषियों और पितरों की उपस्थिति में शिलादपुत्र नन्दी ने ब्रह्मापुत्र सनत्कुमार से इस योग के विषय में कहा था। इसलिए माहेश्वर योग का यह उपदेश दिव्य सभा-सदृश वातावरण में बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 37, श्लोक 7
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