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विस्तृत उत्तर
तपस्वी ऋषियों ने सूतजी से लिङ्गमाहात्म्ययुक्त पुण्यदायिनी पुराणसंहिता सुनना चाहा। वे सूतजी को विद्वान, विश्वस्त और पौराणिकों में उत्तम मानते थे। ऋषियों ने कहा कि सूतजी ने व्यासजी से पुराणसंहिता प्राप्त की है, इसलिए वे उनसे लिङ्गमाहात्म्य से युक्त दिव्य पुराणसंहिता के विषय में पूछ रहे हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 14, श्लोक 9-12
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