ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
ॐकार और शब्दब्रह्म📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 14-15, श्लोक 19-21⏱ 1 मिनट पठन

ॐकार को शब्दब्रह्म क्यों कहा गया है?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

क्योंकि ॐकार को साक्षात् शब्दब्रह्म का प्रकाशक और वर्णों से युक्त बताया गया है।

📖

विस्तृत उत्तर

ॐकार को शब्दब्रह्म इसलिए कहा गया है क्योंकि शब्दब्रह्म ही इसका शरीर बताया गया है और इसे साक्षात् शब्दब्रह्म का प्रकाशक कहा गया है। अकारादि से क्षकारान्त वर्णों को इसके अवयव कहा गया है। यह अनेक रूपों में स्थित होकर भी अव्यक्त, परात्पर और सूक्ष्मातिसूक्ष्म है। इसलिए ॐकार को केवल उच्चारण नहीं, बल्कि शब्दब्रह्म को प्रकट करनेवाले तत्त्व के रूप में रखा गया है।

📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 14-15, श्लोक 19-21
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

ॐकार को शब्दब्रह्म क्यों कहा गया है को संदर्भ सहित समझें

ॐकार को शब्दब्रह्म क्यों कहा गया है का सबसे सीधा सार यह है: क्योंकि ॐकार को साक्षात् शब्दब्रह्म का प्रकाशक और वर्णों से युक्त बताया गया है।

ॐकार और शब्दब्रह्म जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 14-15, श्लोक 19-21 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।

•

उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 14-15, श्लोक 19-21 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

•

ॐकार और शब्दब्रह्म श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

•

यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

ॐकार और शब्दब्रह्म प्रश्नोत्तर
🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

ॐकारओंकारशब्दब्रह्मपरम तत्त्वश्रीलिङ्गमहापुराणपूर्वभाग अध्याय 1
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

ॐकार को शब्दब्रह्म क्यों कहा गया है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको ॐकार और शब्दब्रह्म से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 14-15, श्लोक 19-21 पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#ॐकार#ओंकार#शब्दब्रह्म#परम तत्त्व#श्रीलिङ्गमहापुराण#पूर्वभाग अध्याय 1