विस्तृत उत्तर
शिव को ओंकार और सर्वज्ञ रूप में विष्णु ने नमस्कार किया है। स्तुति में कहा गया है कि आप भगवान् को नमस्कार है, सर्पों के पति को नमस्कार है, ओंकार को नमस्कार है और सर्वज्ञ को बार-बार नमस्कार है। यह वर्णन शिव को प्रणव और सर्वज्ञान से जोड़ता है। पहले भी उन्हें प्रणवरूप रुद्र कहा गया है, और यहाँ वे ओंकार तथा सर्वज्ञ रूप में फिर से वंदित होते हैं। इसलिए शिव का ओंकार और सर्वज्ञ स्वरूप स्तोत्र का प्रमुख भाग है।
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