विस्तृत उत्तर
शिव को गणों का स्वामी इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्तुति में उन्हें सीधे गणों के अधिपति के रूप में नमस्कार किया गया है। उसी श्लोक में शिव को शब्द और स्पर्श स्वरूप, रस और गंध स्वरूप, गंधी और गुहा से भी गुह्यतम रुद्र कहा गया है। यहाँ गणों के अधिपति होने का अलग विस्तार नहीं दिया गया, पर विष्णु की स्तुति शिव को गणों के स्वामी और अत्यन्त गुह्य रुद्र रूप में स्थापित करती है।
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