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विस्तृत उत्तर
शिव स्थाणु इसलिए कहलाए कि रुद्रात्मक सृष्टि से निवृत्त आत्मा वाले होकर वे अधिष्ठित हो गए। पाठ में कहा गया है कि उस समय भगवान् शंकर रुद्रों की सृष्टि से निवृत्त होकर स्थित हुए। वे निष्कल आत्मा वाले और अपनी इच्छा से शरीर धारण करने वाले महात्मा हैं। इसी से उनका स्थाणुत्व कहा गया और वे दयार्द्र होकर प्राणियों का कल्याण करते हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 6, PDF पृष्ठ 36, श्लोक 20-21
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