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विस्तृत उत्तर
सदाशिव की कृपा से सत्-असत् वस्तु-विवेकरूप विचार और सांसारिक विषयों का त्याग एक साथ संभव होता है। पाठ में कहा गया है कि आत्मानात्मविवेक के बिना किया गया क्षणिक विषयत्याग अस्थायी है। सही विवेक और विषयत्याग का साथ होना परमेष्ठी सदाशिव के कृपा-प्रसाद से ही सम्भव बताया गया है। यही स्थायी वैराग्य की दिशा देता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 6, PDF पृष्ठ 36-37, श्लोक 24
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