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विस्तृत उत्तर
वैराग्य से शिव दर्शन का क्रम विषयत्याग से शुरू होता है। पाठ में कहा गया है कि प्राणी स्वल्प विषयों का त्याग करके सांसारिक भय से मुक्त होता है और क्रम से वैराग्य को प्राप्त करता है। उस वैराग्य से विरागी पुरुष को अंत में शिवजी का साक्षात् दर्शन प्राप्त होता है। इस क्रम में वैराग्य को मुक्ति और शिव-दर्शन की ओर ले जाने वाला बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 6, PDF पृष्ठ 36, श्लोक 22-23
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