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विस्तृत उत्तर
केवल विषयत्याग अस्थायी तब माना गया है जब वह आत्मानात्मविवेकरूप विशिष्ट ज्ञान के विचार के बिना हो। पाठ में कहा गया है कि संसारनिवर्तक आत्मानात्मविवेक का विचार किये बिना जो क्षणिक विषयत्याग होता है, वह ज्ञानरहित होने से अस्थायी है और अप्रशंस्य है। सत्-असत् वस्तु-विवेक और विषयत्याग का साथ होना सदाशिव की कृपा से सम्भव बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 6, PDF पृष्ठ 36-37, श्लोक 24
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