विस्तृत उत्तर
गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र और महाभारत युद्ध के एक प्रमुख योद्धा अश्वत्थामा को अनेक दिव्यास्त्रों का ज्ञान प्राप्त था। उन्हें यह ज्ञान अपने पिता द्वारा प्राप्त गहन शिक्षा से मिला था। उनके दिव्यास्त्रों के संग्रह में आग्नेयास्त्र, वरुणास्त्र, वायव्यास्त्र, ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र, ब्रह्मशिर के साथ-साथ पर्जन्यास्त्र भी शामिल था। यह अश्वत्थामा की युद्ध कला में असाधारण निपुणता और उनके पिता द्वारा प्रदान की गई गहन शिक्षा को दर्शाता है। हालांकि उपलब्ध पौराणिक विवरणों में अश्वत्थामा द्वारा पर्जन्यास्त्र के किसी विशिष्ट प्रयोग का उल्लेख प्रमुखता से नहीं मिलता।
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