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विस्तृत उत्तर
नारायणास्त्र के संदर्भ में यह ज्ञान गुरु द्रोणाचार्य को उनके पिता ऋषि भारद्वाज (कुछ स्रोतों में उनके पितामह का भी उल्लेख है) से प्राप्त हुआ था जिन्हें यह भगवान नारायण की कृपा से मिला था। इस प्रकार यह ज्ञान गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित हुआ। द्रोणाचार्य का इस अस्त्र पर अधिकार उनकी आध्यात्मिक और युद्ध कौशल में महारत का प्रमाण था।
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