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विस्तृत उत्तर
शिव सबका कल्याण दयार्द्र भाव से करते हैं। पाठ में कहा गया है कि रुद्रात्मक सृष्टि से निवृत्त होकर शंकर अधिष्ठित हुए और इसीलिए भगवान् रुद्र दयार्द्र होकर सभी प्राणियों का कल्याण करते हैं। आगे उनकी आत्मा बिना प्रयत्न ही कल्याण करने वाली कही गई है। वे योगविद्या के द्वारा वैराग्य में स्थित रहते हैं और विरक्त पुरुष की मुक्ति को ही कल्याण कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 6, PDF पृष्ठ 36, श्लोक 20-22
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