विस्तृत उत्तर
भागवत सुनने से ज्ञान, वैराग्य और भक्ति बढ़ने का वर्णन सप्ताह कथा के अंत में आता है। सनकादि ने विधिपूर्वक एक सप्ताह तक सर्वपापहरिणी, पवित्र और भोग-मोक्ष देने वाली भागवत कथा कही। सबने नियमपूर्वक इसे सुना और उसके बाद भगवान पुरुषोत्तम की स्तुति की। कथा के अंत में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को बड़ी पुष्टि मिली। वे तीनों एकदम तरुण हो गए और सब जीवों के मन को आकर्षित करने लगे। यह दृश्य बताता है कि भागवत श्रवण केवल जानकारी नहीं देता; वह भक्ति को पुष्ट करता है, ज्ञान को जाग्रत करता है और वैराग्य को नया बल देता है। नारदजी भी अपना मनोरथ पूरा होने से परम आनंदित हुए।
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