विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में दुख दूर करने का पहला उपाय नारदजी भक्ति से कहते हैं: भगवान श्रीकृष्ण के चरणकमलों का चिंतन करो, उनकी कृपा से दुख दूर हो जाएगा। वे भक्ति को स्मरण कराते हैं कि श्रीकृष्ण कहीं चले नहीं गए; उन्होंने द्रौपदी की रक्षा की और गोपसुंदरियों को सनाथ किया। आगे वे कहते हैं कि एकमात्र भक्ति मुक्ति देने वाली है। जब ज्ञान और वैराग्य नहीं जागते, तब सनकादि ऋषि श्रीमद्भागवत पारायण को उपाय बताते हैं। उसके शब्दों से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल मिलता है और कलियुग के दोष मिटते हैं। श्रीमद्भागवत को शोक और दुख का विनाश करने वाला भी कहा गया है। अंत में नारदजी सत्संग की महिमा कहते हैं कि संतों का दर्शन संसार-दुखरूपी दावानल से तपे लोगों पर शांति की वर्षा करता है। इसलिए स्रोत के अनुसार दुख दूर करने का मार्ग कृष्ण-स्मरण, भक्ति, श्रीमद्भागवत श्रवण और सत्संग है।
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