विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में भागवत सप्ताह की श्रेष्ठता बहुत स्पष्ट कही गई है। सनकादि कहते हैं कि जो फल तप, योग और समाधि से भी प्राप्त नहीं हो सकता, वह सर्वांगपूर्ण सप्ताह श्रवण से अनायास मिल जाता है। वे आगे सप्ताह को यज्ञ से बढ़कर, तप से बढ़कर, तीर्थसेवन से बढ़कर, योग से बढ़कर, ध्यान और ज्ञान से भी बढ़कर बताते हैं। यह वर्णन अतिशयोक्ति के रूप में नहीं, बल्कि भागवत श्रवण की कलियुग-सुलभता और फल-प्रधानता के संदर्भ में दिया गया है। स्रोत के अनुसार सप्ताह इसलिए बड़ा है क्योंकि कठिन साधनों का फल भी यह सरल श्रवण-मार्ग से उपलब्ध कराता है।
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