विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में नारदजी ज्ञान और वैराग्य को जगाने के लिये वेदध्वनि, वेदांतघोष और बार-बार गीता-पाठ करते हैं। उससे वे जैसे-तैसे उठते हैं, पर आलस्य, जंभाई, दुर्बलता और वृद्धावस्था के कारण फिर ठीक से जाग नहीं पाते। बाद में नारदजी सनकादि ऋषियों से पूछते हैं कि जब वेद, वेदांत और गीता-पाठ से वे नहीं जगे, तो श्रीमद्भागवत सुनाने से कैसे जागेंगे, क्योंकि भागवत के प्रत्येक श्लोक और पद में भी वेद का सार है। सनकादि इसका उत्तर देते हैं कि भागवत कथा वेद और उपनिषदों के सार से बनी है, पर उनसे अलग फलरूप में प्रकट होने से अधिक सुग्राह्य और उत्तम हो जाती है। वे वृक्ष के रस और फल, दूध और घी, ईख और खांड के उदाहरण देते हैं। इसलिए स्रोत के अनुसार गीता-पाठ का प्रयास हुआ, पर ज्ञान-वैराग्य को पूर्ण बल देने वाला उपाय श्रीमद्भागवत पारायण बताया गया।
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