विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में सनकादि ऋषि स्पष्ट कहते हैं कि श्रीमद्भागवत पारायण के शब्द सुनने से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बड़ा बल मिलता है। इससे ज्ञान और वैराग्य का कष्ट मिटता है और भक्ति को सुख प्राप्त होता है। नारदजी को संदेह होता है कि वेद, वेदांत और गीता से जो काम न हुआ, वह भागवत से कैसे होगा, क्योंकि भागवत के प्रत्येक श्लोक और पद में वेद का सार है। सनकादि उत्तर देते हैं कि भागवत कथा वेद और उपनिषदों के सार से बनी है, पर फलरूप में पृथक प्रकट होने से अधिक मधुर और उपयोगी है। वे वृक्ष के रस और फल, दूध और घी, तथा ईख और खांड के उदाहरण देते हैं। फिर वे कहते हैं कि यह भागवत पुराण भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की स्थापना के लिये प्रकाशित हुआ है। इसलिए भागवत से ज्ञान-वैराग्य इसलिए बढ़ता है क्योंकि वह वेद-सार को फलरूप, श्रवणयोग्य और भक्ति से संयुक्त रूप में प्रकट करती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





