विस्तृत उत्तर
हाँ, श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में श्रीमद्भागवत सुनने को वैकुंठफल से जोड़ा गया है। बताया गया है कि पूर्वकाल में राजा परीक्षित की मुक्ति देखकर ब्रह्माजी को भी आश्चर्य हुआ। उन्होंने सत्यलोक में तराजू बाँधकर अनेक साधनों को तौला। उस तौल में अन्य साधन हलके पड़े और श्रीमद्भागवत अपने महत्व के कारण सबसे भारी सिद्ध हुई। इसे देखकर ऋषियों को भी बड़ा विस्मय हुआ। फिर यह निर्णय बताया गया कि कलियुग में यह भगवत्स्वरूप शास्त्र पढ़ने और सुनने से शीघ्र वैकुंठफल देने वाला है। सप्ताह-विधि से भागवत सुनने को भी मुक्ति देने वाला कहा गया है। इसलिए इस स्रोत के अनुसार श्रद्धा से श्रीमद्भागवत सुनना केवल पुण्यकर्म नहीं, बल्कि वैकुंठफल और मुक्ति से जुड़ा साधन है।
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