विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में जन्म-मृत्यु के भय से मुक्ति का मार्ग श्रीमद्भागवत और भक्ति से जुड़ा बताया गया है। सूतजी शौनकजी से कहते हैं कि वे ऐसा सार सुनाएंगे जो संसार-भय का नाश करता है। वे यह भी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत कलियुग में कालरूपी सर्प के मुख से पीड़ित जीवों के भय को दूर करने के लिये कहा गया शास्त्र है। इसके बाद वे बताते हैं कि मन की शुद्धि के लिये इससे बढ़कर कोई साधन नहीं है। जब जन्म-जन्मांतर का पुण्य उदय होता है, तभी मनुष्य को भागवत की प्राप्ति होती है। आगे भागवत को वैकुंठफल देने वाला और सप्ताह-विधि से सुनने पर मुक्ति देने वाला कहा गया है। इसलिए स्रोत के अनुसार जन्म-मृत्यु के भय से मुक्ति के लिये भागवत का श्रवण, भगवान की कथा में श्रद्धा, भक्ति की वृद्धि और हरि-कीर्तन मुख्य साधन हैं।
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