विस्तृत उत्तर
विपदः सन्तु नः शश्वत् कुंती की प्रसिद्ध प्रार्थना का आरंभ है। दिए गए हिंदी अर्थ में कुंती भगवान से कहती है कि हमारे जीवन में सदा, पद-पद पर विपत्तियाँ आती रहें। इसका कारण वह तुरंत बताती है: विपत्तियों में निश्चित रूप से कृष्ण का दर्शन होता है। फिर वह कृष्ण-दर्शन का फल बताती है कि दर्शन हो जाने पर फिर जन्म-मृत्यु के चक्कर में नहीं आना पड़ता। इसलिए इस वाक्य का अर्थ केवल दुख या संकट मांगना नहीं है। कुंती के भाव में विपत्ति वह अवसर है जिसमें भक्त कृष्ण को याद करता है, उनका दर्शन पाता है और संसार के जन्म-मरण से छूटने की दिशा में जाता है।
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