विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में भक्ति बढ़ाने का उपाय भक्ति की स्थापना और श्रीमद्भागवत से जुड़ा बताया गया है। नारदजी भक्ति से कहते हैं कि वे उसे घर-घर और जन-जन के हृदय में स्थापित करेंगे। वे यह भी कहते हैं कि अन्य धर्मों को दबाकर और भक्ति-विषयक महोत्सवों को आगे रखकर वे भक्ति का प्रचार करेंगे। भक्ति नारदजी से प्रसन्न होकर कहती है कि वे कृपालु हैं और उन्होंने क्षणभर में उसका दुख दूर कर दिया, पर ज्ञान और वैराग्य अभी जागे नहीं हैं। बाद में सनकादि ऋषि बताते हैं कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल देने वाला सत्कर्म श्रीमद्भागवत का पारायण है। उसके शब्द सुनने से भक्ति को आनंद और ज्ञान-वैराग्य को बल मिलता है। वर्णन के अंत में नारदजी कहते हैं कि सत्संग अज्ञानजनित मोह और मद के अंधकार को मिटाकर विवेक जगाता है। इसलिए भक्ति बढ़ाने के लिये श्रीमद्भागवत श्रवण-पारायण, भक्ति का प्रचार और सत्संग मुख्य बताए गए हैं।
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