दुष्ट व्यक्ति सत्संग पाकर कैसे सुधरता है — तुलसीदासजी ने कौन सा दृष्टान्त दिया?
पारस पत्थर और लोहे का दृष्टान्त दिया — जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है, वैसे ही सत्संग से दुष्ट भी सुधर जाता है। उल्टा नहीं होता — सज्जन कुसंगति में भी साँप की मणि समान अपने गुण रखता है।