विस्तृत उत्तर
इस चौपाई का अर्थ है कि सत्संग (संतों की संगति) के बिना विवेक (सत्-असत् का भेद जानने की बुद्धि) नहीं होता।
पूरी चौपाई — 'बिनु सत्संग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। सत्संगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला॥'
इसका अर्थ — सत्संगके बिना विवेक नहीं होता और श्रीरामजीकी कृपाके बिना वह सत्संग सहजमें मिलता नहीं। सत्संगति आनन्द और कल्याणकी जड़ है। सत्संगकी सिद्धि (प्राप्ति) ही फल है और सब साधन तो फूल हैं।
इसकी शिक्षा यह है कि जीवन में सबसे पहले सत्संग प्राप्त करना चाहिये, क्योंकि सत्संग से ही विवेक जागता है, विवेक से भक्ति और भक्ति से मोक्ष मिलता है। लेकिन सत्संग भी भगवान राम की कृपा से ही मिलता है।



