का सरल उत्तर
अर्थ — सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और राम की कृपा के बिना सत्संग सहज में नहीं मिलता। सत्संगति आनन्द और कल्याण की जड़ है — सत्संग की प्राप्ति ही फल है और बाकी सब साधन फूल हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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