विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में ज्ञान और वैराग्य को जगाने का प्रसंग विस्तार से आता है। भक्ति के कहने पर नारदजी ज्ञान और वैराग्य को हाथ से हिलाकर जगाते हैं और उनके कान के पास पुकारते हैं। वे वेदध्वनि, वेदांतघोष और बार-बार गीता-पाठ करके भी उन्हें जगाने का प्रयास करते हैं। वे जैसे-तैसे उठते हैं, पर फिर आलस्य, दुर्बलता और वृद्धावस्था के कारण सोने लगते हैं। नारदजी चिंता में भगवान का स्मरण करते हैं। तब आकाशवाणी कहती है कि एक सत्कर्म करने पर उनकी नींद और वृद्धावस्था चली जाएगी। सनकादि ऋषि बाद में बताते हैं कि वह सत्कर्म श्रीमद्भागवत का पारायण है। उसके शब्द सुनने से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बड़ा बल मिलता है। इसलिए स्रोत के अनुसार ज्ञान और वैराग्य को जगाने का उपाय श्रीमद्भागवत का श्रवण-पारायण है।
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