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विस्तृत उत्तर
जनलोक चेतना के ऊर्ध्वगामी स्तर का प्रतीक है। यह मोह, माया, सांसारिक इच्छाओं और स्वर्ग के भोगों से ऊपर उठी हुई चेतना का लोक है। इसे विशुद्ध ज्ञान, उच्च बौद्धिकता, पूर्ण वैराग्य और सात्त्विक ऊर्जा का केंद्र कहा गया है। जनलोक की वास्तविक अधिकारी वे आत्माएँ हैं जो भोग और आसक्ति से ऊपर उठकर ज्ञान, वैराग्य और ब्रह्म-चिंतन की अवस्था तक पहुँचती हैं।
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