विस्तृत उत्तर
भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को अलग-अलग संघर्षपूर्ण साधन की तरह नहीं, बल्कि आपस में जुड़े हुए फल की तरह दिखाया गया है। भगवान वासुदेव में भक्ति योग लगते ही, अनन्य प्रेम से चित्त उनसे जुड़ते ही, निष्काम ज्ञान और वैराग्य शीघ्र प्रकट होते हैं। आगे श्रद्धालु मुनियों के बारे में कहा गया है कि वे भागवत श्रवण से प्राप्त ज्ञान-वैराग्ययुक्त भक्ति से अपने हृदय में परम तत्त्वस्वरूप परमात्मा का अनुभव करते हैं। इसका अर्थ है कि जब भक्ति भगवान में निस्वार्थ और स्थिर होती है, तो वह मन को शुद्ध करती है। शुद्ध मन में वास्तविक ज्ञान जागता है और संसार की अनावश्यक आसक्ति अपने आप कम होती है।
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