श्रीमद्भागवतचतुर्व्यूह भगवान कौन हैं?नारदजी के मंत्र में वासुदेव, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध और संकर्षण चार नाम चतुर्व्यूह रूप से जुड़े हैं।#चतुर्व्यूह#वासुदेव#प्रद्युम्न
श्रीमद्भागवतनमो भगवते वासुदेवाय मंत्र किसके लिए है?यह मंत्र वासुदेव, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध और संकर्षण रूप भगवान के ध्यान और नमस्कार से जुड़ा है।#नमो भगवते वासुदेवाय#वासुदेव#चतुर्व्यूह
श्रीमद्भागवतकृष्ण से अनन्य प्रेम करने का फल क्या है?जो भगवान वासुदेव से सर्वात्मभाव और अनन्य प्रेम करते हैं, वे जन्म-मरण रूप संसार के भयंकर चक्र में फिर नहीं पड़ते।#कृष्ण प्रेम#अनन्य प्रेम#जन्म मृत्यु
श्रीमद्भागवतवेदों का अंतिम लक्ष्य क्या है?वेद, यज्ञ, योग, कर्म, ज्ञान, तप, धर्म और सभी गतियों का अंतिम लक्ष्य वासुदेव श्रीकृष्ण बताया गया है।#वेद#वासुदेव#कृष्ण
श्रीमद्भागवतभक्ति से ज्ञान और वैराग्य कैसे आते हैं?भगवान वासुदेव में भक्ति लगते ही अनन्य प्रेम से निष्काम ज्ञान और वैराग्य शीघ्र प्रकट होते हैं।#भक्ति#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवतनिष्काम भक्ति का मतलब क्या है?निष्काम भक्ति का अर्थ है बिना किसी फल-कामना के भगवान में स्थिर प्रेम, जिससे ज्ञान और वैराग्य अपने आप आते हैं।#निष्काम भक्ति#भक्ति#वासुदेव
लोकतपोलोक के निवासी भगवान वासुदेव से कैसे जुड़े हैं?तपोलोक के निवासी वासुदेव को समर्पित, ब्रह्म-ध्यान में लीन और निष्काम भक्ति वाले बताए गए हैं।#तपोलोक#वासुदेव#भक्ति
लोकस्कंद पुराण में वैराज देवगणों की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?स्कंद पुराण में वैराज देवगण तृष्णा-मुक्त, निवृत्ति मार्गी, वासुदेव-समर्पित और ब्रह्म-ध्यान में लीन बताए गए हैं।#स्कंद पुराण#वैराज#तृष्णा
लोकतपोलोक कैसे प्राप्त होता है?तपोलोक वैराग्य, षड्रिपु-नाश, ब्रह्म-ध्यान और वासुदेव-परायण साधना से प्राप्त होता है।#तपोलोक प्राप्ति#वैराग्य#ब्रह्म ध्यान
पूजन विधानअनंत सूत्र बांधते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?धागा बांधते समय मंत्र बोलना चाहिए— 'अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव...'। इसका मतलब है: हे वासुदेव, इस संसार रूपी बड़े समुद्र से मुझे बचाइए।#मंत्र#वासुदेव#प्रार्थना