विस्तृत उत्तर
तपोलोक की प्राप्ति केवल भौतिक पुण्यों या सकाम कर्मकांडों से संभव नहीं है। स्वर्ग आदि लोकों की प्राप्ति सकाम कर्मों, यज्ञों, इष्टापूर्त कर्मों और देवताओं की आराधना से होती है, परंतु महर्लोक, जनलोक और तपोलोक जैसे उच्च लोकों में प्रवेश के लिए जीव को काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मात्सर्य जैसे षड्रिपुओं का पूर्ण नाश करना अनिवार्य है। तपोलोक ऐसे सन्यासियों, योगियों और वासुदेव-परायण सिद्ध साधकों को प्राप्त होता है जो एकांत में रहते हैं, सदा ब्रह्म का ध्यान करते हैं, आत्मा के संतोष में लीन रहते हैं और भगवान के द्वादशाक्षर मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का निरंतर चिंतन करते हैं।
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