विस्तृत उत्तर
शिव को वेदशास्त्ररूप इसलिए कहा गया है क्योंकि विष्णु की स्तुति में उन्हें सीधे वेदशास्त्ररूप के रूप में नमस्कार किया गया है। उसी पंक्ति में भुवनेशदेव, सारंग और राजहंस को भी नमस्कार है। आगे शिव को वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ कहा गया है। यह वर्णन शिव को वेद, शास्त्र, विश्व और गर्भित सृष्टि के आधार से जोड़ता है। स्रोत में इससे अधिक तर्क-विस्तार नहीं दिया गया, इसलिए उत्तर स्तुति में आए उन्हीं नामों तक सीमित है।
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