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विस्तृत उत्तर
नीलकंठ शिव का वर्णन ज्ञान और चैतन्य से जुड़े नामों के साथ आता है। विष्णु उन्हें ज्ञानरूप, ज्ञानगम्य और चैतन्यरूप को सर्वदा नमस्कार कहते हैं। उसी क्रम में शिखर और नीलकंठ को नमस्कार किया गया है। आगे नीलकेश, वित्त और शितिकंठ को भी नमस्कार है। कपर्दी, अर्थात् जटाजूट धारण करने वाले, और अंगों के आभूषण रूप में सर्प धारण करने वाले शिव को भी वंदित किया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 18, PDF पृष्ठ 85, श्लोक 29 और 33
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