विस्तृत उत्तर
शिव के सर्प आभूषणों का कई स्थानों पर वर्णन है। उन्हें भुजंगरूप कंकण धारण करने वाला कहा गया है। आगे अंगों के आभूषण रूप में सर्प धारण करने वाले शिव को नमस्कार है। सर्प का बाजूबंद धारण करने वाले शिव को भी वंदित किया गया है। अंतिम वर्णन में शिव को सर्प का जनेऊ, सर्पों के कुण्डल, सर्पों की माला और सर्प का कटिसूत्र धारण करने वाला कहा गया है। इस तरह सर्प उनके आभूषण, यज्ञोपवीत, कुण्डल, माला और करधनी रूप में वर्णित हैं।
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