विस्तृत उत्तर
प्रणवरूप रुद्र शिव का वह रूप है जिसे विष्णु ने अद्वितीय और नाशरहित कहा है। स्तुति की शुरुआत में ही वे प्रणवरूप रुद्र को नमस्कार करते हैं। इसके साथ अकाररूप परमात्मा और उकाररूप आदिदेव विद्यादेह को नमस्कार है। तीसरे मकाररूप परमात्मा शिव को भी प्रणाम किया गया है। इस प्रकार प्रणव, रुद्र, अकार, उकार, मकार और परमात्मा भाव को एक साथ जोड़कर महेश्वर की स्तुति की गई है।
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