विस्तृत उत्तर
अकार, उकार और मकार प्रणव की तीन मात्राएँ हैं। विष्णु ने लिंग के दक्षिण भाग में अकार, उत्तर भाग में उकार और मध्य में मकार देखा। आगे कहा गया है कि एकाक्षर प्रणव से अकारसंज्ञक ब्रह्मा, उकारसंज्ञक परमकारण विष्णु और मकारसंज्ञक परमेश्वर नीललोहित का प्रादुर्भाव हुआ। अकारसंज्ञक ब्रह्मा सृष्टि के निर्माता हैं, उकारसंज्ञक विष्णु मोह करने वाले हैं और मकारसंज्ञक शिव ब्रह्मा-विष्णु पर अनुग्रह करने वाले हैं।
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