विस्तृत उत्तर
उमा-महेश्वर ब्रह्मा और विष्णु की स्तुति के बाद प्रकट हुए। दोनों ने वेद-वाक्यों से शिव को जानकर वैदिक मंत्रों से महादेव की स्तुति की। उस स्तवन से प्रसन्न होकर मायारहित महेश्वर दिव्य शब्दमय रूप धारण कर लिंग में प्रकट हुए। बाद में भगवान् विष्णु ने उमा के साथ उन महेश्वर को देखा और उन्हें प्रणाम किया। ऊपर देखने पर उन्हें ओंकार, गायत्री, अथर्ववेद, यजुर्वेद और सामवेद से उत्पन्न पाँच पवित्र मंत्र भी दिखाई दिए।
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