विस्तृत उत्तर
तत्पुरुष मंत्र पाँच मंत्रों में गायत्री से उत्पन्न बताया गया है। यह चार कलाओं वाला, चौबीस अक्षरों से युक्त, वश्यकारक और हरित वर्ण का अत्युत्तम मंत्र कहा गया है। पाठ में इसे तत्पुरुषाय विद्महे से आरम्भ होने वाले मंत्र के रूप में सूचित किया गया है। यह मंत्र उमा-महेश्वर के दर्शन के बाद विष्णु को अन्य मंत्रों के साथ दृष्टिगोचर हुआ। ईशान, तत्पुरुष, अघोर, सद्योजात और वामदेव इन पाँचों मंत्रों को प्राप्त कर विष्णु ने उनका जप आरम्भ किया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





