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ग्रह मंत्र📜 ज्योतिष शास्त्र1 मिनट पठन

शुक्र गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे...तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' 16,000। शुक्रवार, श्वेत वस्त्र, हीरा/स्फटिक। शुक्र = सुख/सौंदर्य/दांपत्य। + लक्ष्मी पूजा।

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विस्तृत उत्तर

शुक्र गायत्री

'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्'

बीज: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' (16,000)

सरल: 'ॐ शुक्राय नमः' (108 नित्य)

कब: शुक्रवार। प्रातःकाल/सायंकाल। देवी पूजा (शुक्र = देवी संबंधित)।

कैसे: श्वेत/हल्के रंग वस्त्र → श्वेत पुष्प/खीर/मिश्री भोग → हीरा/स्फटिक माला → पूर्व/दक्षिण-पूर्व → 108 बार।

शुक्र = सुख, सौंदर्य, वैवाहिक सुख, कला, धन, वाहन। कमजोर शुक्र = दांपत्य कलह, सुख कम, कला में बाधा। शुक्र मंत्र + लक्ष्मी/देवी पूजा = शुक्र बलवान।

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शास्त्रीय स्रोत
ज्योतिष शास्त्र
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