विस्तृत उत्तर
शुक्र गायत्री
'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्'
बीज: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' (16,000)
सरल: 'ॐ शुक्राय नमः' (108 नित्य)
कब: शुक्रवार। प्रातःकाल/सायंकाल। देवी पूजा (शुक्र = देवी संबंधित)।
कैसे: श्वेत/हल्के रंग वस्त्र → श्वेत पुष्प/खीर/मिश्री भोग → हीरा/स्फटिक माला → पूर्व/दक्षिण-पूर्व → 108 बार।
शुक्र = सुख, सौंदर्य, वैवाहिक सुख, कला, धन, वाहन। कमजोर शुक्र = दांपत्य कलह, सुख कम, कला में बाधा। शुक्र मंत्र + लक्ष्मी/देवी पूजा = शुक्र बलवान।





