ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

ग्रह — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 8 प्रश्न

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ग्रह मंत्र

शुक्र गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?

'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे...तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' 16,000। शुक्रवार, श्वेत वस्त्र, हीरा/स्फटिक। शुक्र = सुख/सौंदर्य/दांपत्य। + लक्ष्मी पूजा।

शुक्रगायत्रीसुख
ग्रह मंत्र

बुध गायत्री मंत्र का जप बुद्धि वृद्धि के लिए कैसे करें?

'ॐ गजध्वजाय विद्महे...तन्नो बुधः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' 9,000। बुधवार, हरे वस्त्र, पन्ना/स्फटिक। बुध = बुद्धि/वाणी कारक। + गणेश + सरस्वती = अधिकतम।

बुधगायत्रीबुद्धि
ग्रह मंत्र

सूर्य मंत्र का जप कब और कैसे करें?

बीज: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' 7,000। गायत्री = मूलतः सूर्य मंत्र। सूर्योदय, रविवार, सूर्य मुख, जल अर्घ्य, 108। उद्देश्य: आत्मविश्वास, पदोन्नति, नेत्र/हृदय, सूर्य शांति।

सूर्यमंत्रजप
तंत्र शास्त्र

तंत्र में रत्नों का प्रयोग कैसे और क्यों किया जाता है?

रत्न = ग्रह ऊर्जा वाहक। 9 ग्रह-9 रत्न: सूर्य=माणिक्य, चंद्र=मोती, मंगल=मूंगा, बुध=पन्ना, गुरु=पुखराज, शुक्र=हीरा, शनि=नीलम, राहु=गोमेद, केतु=लहसुनिया। अभिमंत्रित → धारण। नीलम=सावधानी। ज्योतिषी → कुण्डली → सही रत्न।

रत्नग्रहतंत्र
ग्रह मंत्र

चंद्र गायत्री मंत्र का जप मन शांति के लिए कैसे करें?

'ॐ पद्मध्वजाय विद्महे...तन्नो सोमः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' 11,000। सोमवार, श्वेत वस्त्र, मोती/स्फटिक। चंद्र = मन कारक — बलवान चंद्र = स्थिर मन। शिव पूजा + दूध दान।

चंद्रगायत्रीमन शांति
तंत्र ज्ञान

तंत्र और ज्योतिष में क्या संबंध है?

ज्योतिष = निदान (कौन सा ग्रह दोष)। तंत्र = उपचार (कौन सा मंत्र/यंत्र)। ग्रह = देवता। मुहूर्त (ज्योतिष) + साधना (तंत्र)। शनि साढ़ेसाती → हनुमान+शनि यंत्र। दोनों = वेदांग।

तंत्रज्योतिषसंबंध
मंत्र जप लाभ

मंत्र जप से ग्रह दोष कैसे दूर होता है?

प्रत्येक ग्रह = देवता मंत्र। सूर्य=गायत्री, चंद्र=शिव, मंगल/शनि=हनुमान, शुक्र=श्री सूक्त, राहु=सप्तशती। सर्वग्रह: महामृत्युंजय सवा लाख। ज्योतिष आधारित।

ग्रहदोषदूर
ग्रह मंत्र

सूर्य गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?

गायत्री मंत्र = मूलतः सूर्य (सवितृ) मंत्र ही। विशिष्ट: 'ॐ आदित्याय विद्महे...' सूर्योदय, सूर्य मुख, अर्घ्य सहित, 108 बार, रविवार। उद्देश्य: सूर्य शांति, नेत्र/हृदय, आत्मविश्वास, पदोन्नति।

सूर्य गायत्रीसूर्यग्रह

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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