विस्तृत उत्तर
तंत्र + ज्योतिष = परस्पर पूरक:
संबंध
- 1ज्योतिष = निदान: कुंडली → ग्रह दोष पहचान। तंत्र = उपचार → मंत्र/यंत्र से दोष शांति।
- 2ग्रह = देवता: प्रत्येक ग्रह = विशिष्ट देवता। ज्योतिष बताए 'कौन सा ग्रह' → तंत्र बताए 'कौन सा मंत्र/यंत्र'।
- 3मुहूर्त: ज्योतिष = शुभ मुहूर्त। तंत्र = उस मुहूर्त में साधना।
- 4यंत्र = ग्रह शांति: नवग्रह यंत्र, शनि यंत्र, राहु यंत्र = ज्योतिष + तंत्र संयुक्त।
उदाहरण: शनि साढ़ेसाती (ज्योतिष) → हनुमान चालीसा + शनि यंत्र (तंत्र)। मांगलिक (ज्योतिष) → मंगल मंत्र + कात्यायनी (तंत्र)।
सार: ज्योतिष = 'क्या समस्या', तंत्र = 'कैसे समाधान'। दोनों = वेदांग।





