ग्रह मंत्रशुक्र गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे...तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' 16,000। शुक्रवार, श्वेत वस्त्र, हीरा/स्फटिक। शुक्र = सुख/सौंदर्य/दांपत्य। + लक्ष्मी पूजा।#शुक्र#गायत्री#सुख
ग्रह मंत्रबुध गायत्री मंत्र का जप बुद्धि वृद्धि के लिए कैसे करें?'ॐ गजध्वजाय विद्महे...तन्नो बुधः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' 9,000। बुधवार, हरे वस्त्र, पन्ना/स्फटिक। बुध = बुद्धि/वाणी कारक। + गणेश + सरस्वती = अधिकतम।#बुध#गायत्री
लोकराहु ग्रह का भुवर्लोक से क्या संबंध है?राहु ग्रह सूर्य से दस हजार योजन नीचे है और राहु के नीचे से भुवर्लोक की सर्वोच्च सीमा शुरू होती है जहाँ सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक हैं।#राहु#भुवर्लोक#सूर्यमंडल
ज्योतिष उपायग्रहों की दशा खराब हो तो क्या उपाय करें?नवग्रह स्तोत्र(रोज़ 3 min), हनुमान चालीसा, नवग्रह हवन, ग्रह-विशिष्ट बीज मंत्र 108+दान+वार व्रत, रत्न(ज्योतिषी), गरीब सेवा, गीता कर्मयोग। ज्योतिषी से कुंडली-विशिष्ट। कर्म शुद्धि=सबसे बड़ा उपाय।#दशा#ग्रह#उपाय
कालसर्प दोष: परिचय और कारणकालसर्प दोष में सभी ग्रह कहाँ फँस जाते हैं?कालसर्प दोष में जन्म-कुंडली के सभी सात ग्रह राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूंछ) के मध्य एक ओर फँस जाते हैं।#कालसर्प दोष#ग्रह#राहु केतु
ज्योतिषग्रहों का मनुष्य पर प्रभाव वैज्ञानिक प्रमाणसिद्ध: सूर्य (विटामिन D/ऋतुएं), चंद्र (ज्वारभाटा)। अप्रमाणित: शनि/मंगल/गुरु आदि = नगण्य गुरुत्वाकर्षण। राहु-केतु = गणितीय बिंदु। सूर्य/चंद्र = हाँ; शेष = प्रमाण नहीं। विश्वास व्यक्तिगत।#ग्रह#प्रभाव#वैज्ञानिक
ज्योतिष दोष एवं उपाय12 राशियों के स्वामी ग्रहमेष-मंगल, वृष-शुक्र, मिथुन-बुध, कर्क-चंद्र, सिंह-सूर्य, कन्या-बुध, तुला-शुक्र, वृश्चिक-मंगल, धनु-गुरु, मकर-शनि, कुंभ-शनि, मीन-गुरु।#12 राशि#स्वामी#ग्रह
ज्योतिष दोष एवं उपाय27 नक्षत्रों के नाम और स्वामी ग्रह27 नक्षत्र = 9 ग्रह × 3 each। अश्विनी(केतु), रोहिणी(चंद्र), पुष्य(शनि), मघा(केतु), हस्त(चंद्र), स्वाति(राहु), मूल(केतु), श्रवण(चंद्र), रेवती(बुध)। क्रम: केतु→शुक्र→सूर्य→चंद्र→मंगल→राहु→गुरु→शनि→बुध।#27 नक्षत्र#नाम#स्वामी
रत्नरत्न कैसे काम करते हैं ज्योतिषीय रूप सेज्योतिष: रत्न ग्रह तरंगें absorb+amplify → कमजोर ग्रह बल बढ़ाता। 9 ग्रह=9 रत्न (नवरत्न)। त्वचा स्पर्श आवश्यक। वैज्ञानिक प्रमाण अभाव — विश्वास/परंपरा। ज्योतिषी से कुंडली अनिवार्य।#रत्न#ज्योतिष#कार्यप्रणाली
ग्रह मंत्रसूर्य मंत्र का जप कब और कैसे करें?बीज: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' 7,000। गायत्री = मूलतः सूर्य मंत्र। सूर्योदय, रविवार, सूर्य मुख, जल अर्घ्य, 108। उद्देश्य: आत्मविश्वास, पदोन्नति, नेत्र/हृदय, सूर्य शांति।#सूर्य#मंत्र#जप
रत्न शास्त्ररत्न किस उंगली में पहनें — ग्रह अनुसार?तर्जनी=पुखराज(गुरु), मध्यमा=नीलम/गोमेद(शनि/राहु), अनामिका=माणिक/मूंगा/हीरा, कनिष्ठा=पन्ना/मोती। गलत उंगली=गलत फल।#रत्न उंगली#ग्रह
तंत्र शास्त्रतंत्र में रत्नों का प्रयोग कैसे और क्यों किया जाता है?रत्न = ग्रह ऊर्जा वाहक। 9 ग्रह-9 रत्न: सूर्य=माणिक्य, चंद्र=मोती, मंगल=मूंगा, बुध=पन्ना, गुरु=पुखराज, शुक्र=हीरा, शनि=नीलम, राहु=गोमेद, केतु=लहसुनिया। अभिमंत्रित → धारण। नीलम=सावधानी। ज्योतिषी → कुण्डली → सही रत्न।#रत्न#ग्रह#तंत्र
ग्रह मंत्रचंद्र गायत्री मंत्र का जप मन शांति के लिए कैसे करें?'ॐ पद्मध्वजाय विद्महे...तन्नो सोमः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' 11,000। सोमवार, श्वेत वस्त्र, मोती/स्फटिक। चंद्र = मन कारक — बलवान चंद्र = स्थिर मन। शिव पूजा + दूध दान।#चंद्र#गायत्री#मन शांति
तंत्र ज्ञानतंत्र और ज्योतिष में क्या संबंध है?ज्योतिष = निदान (कौन सा ग्रह दोष)। तंत्र = उपचार (कौन सा मंत्र/यंत्र)। ग्रह = देवता। मुहूर्त (ज्योतिष) + साधना (तंत्र)। शनि साढ़ेसाती → हनुमान+शनि यंत्र। दोनों = वेदांग।#तंत्र#ज्योतिष#संबंध
मंत्र जप लाभमंत्र जप से ग्रह दोष कैसे दूर होता है?प्रत्येक ग्रह = देवता मंत्र। सूर्य=गायत्री, चंद्र=शिव, मंगल/शनि=हनुमान, शुक्र=श्री सूक्त, राहु=सप्तशती। सर्वग्रह: महामृत्युंजय सवा लाख। ज्योतिष आधारित।#ग्रह#दोष#दूर
ग्रह मंत्रसूर्य गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?गायत्री मंत्र = मूलतः सूर्य (सवितृ) मंत्र ही। विशिष्ट: 'ॐ आदित्याय विद्महे...' सूर्योदय, सूर्य मुख, अर्घ्य सहित, 108 बार, रविवार। उद्देश्य: सूर्य शांति, नेत्र/हृदय, आत्मविश्वास, पदोन्नति।#सूर्य गायत्री#सूर्य#ग्रह