विस्तृत उत्तर
सूर्य गायत्री = मूल गायत्री मंत्र ही है, क्योंकि गायत्री मंत्र सवितृ (सूर्य) देवता को संबोधित है:
मंत्र
'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्'
विशिष्ट सूर्य गायत्री
'ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्'
जप विधि
- 1सूर्योदय के समय सूर्य की ओर मुख कर।
- 2शुद्ध जल से सूर्य को अर्घ्य (जल अर्पण) देते हुए जप।
- 3108 बार या 11 माला।
- 4रविवार विशेष।
- 5लाल/ताम्र रंग वस्त्र। रुद्राक्ष/स्फटिक माला।
उद्देश्य: सूर्य ग्रह शांति, नेत्र रोग, हृदय रोग, पिता संबंधी समस्या, आत्मविश्वास, पदोन्नति, सरकारी कार्य।
आदित्य हृदय स्तोत्र भी सूर्य उपासना का सर्वोत्तम अंग — सप्ताह में एक बार अवश्य।





