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ग्रह मंत्र📜 ऋग्वेद, ज्योतिष शास्त्र1 मिनट पठन

सूर्य गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

गायत्री मंत्र = मूलतः सूर्य (सवितृ) मंत्र ही। विशिष्ट: 'ॐ आदित्याय विद्महे...' सूर्योदय, सूर्य मुख, अर्घ्य सहित, 108 बार, रविवार। उद्देश्य: सूर्य शांति, नेत्र/हृदय, आत्मविश्वास, पदोन्नति।

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विस्तृत उत्तर

सूर्य गायत्री = मूल गायत्री मंत्र ही है, क्योंकि गायत्री मंत्र सवितृ (सूर्य) देवता को संबोधित है:

मंत्र

'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्'

विशिष्ट सूर्य गायत्री

'ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्'

जप विधि

  1. 1सूर्योदय के समय सूर्य की ओर मुख कर।
  2. 2शुद्ध जल से सूर्य को अर्घ्य (जल अर्पण) देते हुए जप।
  3. 3108 बार या 11 माला।
  4. 4रविवार विशेष।
  5. 5लाल/ताम्र रंग वस्त्र। रुद्राक्ष/स्फटिक माला।

उद्देश्य: सूर्य ग्रह शांति, नेत्र रोग, हृदय रोग, पिता संबंधी समस्या, आत्मविश्वास, पदोन्नति, सरकारी कार्य।

आदित्य हृदय स्तोत्र भी सूर्य उपासना का सर्वोत्तम अंग — सप्ताह में एक बार अवश्य।

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शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद, ज्योतिष शास्त्र
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