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ग्रह मंत्र📜 ज्योतिष शास्त्र1 मिनट पठन

गुरु बृहस्पति गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

'ॐ वृषभध्वजाय विद्महे...तन्नो गुरुः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 19,000। गुरुवार, पीले वस्त्र, पुखराज/तुलसी। गुरु = ज्ञान/धर्म/विवाह/भाग्य। + विष्णु पूजा।

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विस्तृत उत्तर

गुरु/बृहस्पति गायत्री

'ॐ वृषभध्वजाय विद्महे अंगिरसपुत्राय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्'

अन्य: 'ॐ सुराचार्याय विद्महे सुरश्रेष्ठाय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्'

बीज: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' (19,000)

सरल: 'ॐ गुरवे नमः' या 'ॐ बृहस्पतये नमः' (108 नित्य)

कब: गुरुवार। प्रातःकाल। गुरु पूर्णिमा विशेष।

कैसे: पीले वस्त्र → पीले पुष्प/चने की दाल/केला भोग → पुखराज/तुलसी माला → उत्तर-पूर्व दिशा → 108 बार।

गुरु ग्रह = ज्ञान, धर्म, विवाह, संतान, भाग्य, गुरु कृपा। कमजोर गुरु = विवाह बाधा, संतान कष्ट, भाग्य क्षीण। गुरु मंत्र + विष्णु पूजा = गुरु बलवान।

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शास्त्रीय स्रोत
ज्योतिष शास्त्र
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