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ध्यान📜 मांडूक्योपनिषद, ऋग्वेद, यजुर्वेद, पतञ्जलि योगसूत्र1 मिनट पठन

ध्यान के दौरान कौन सा मंत्र सबसे शक्तिशाली है?

संक्षिप्त उत्तर

ध्यान मंत्र: ॐ (प्रणव) — सर्वोच्च, मांडूक्योपनिषद में 'सब कुछ'। गायत्री — बुद्धि-वृद्धि। महामृत्युंजय — स्वास्थ्य-दीर्घायु। सोऽहम् — निर्गुण ध्यान। इष्टदेव का मंत्र — व्यक्तिगत साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ।

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विस्तृत उत्तर

शास्त्रों में ध्यान के लिए विभिन्न मंत्रों का वर्णन है। प्रत्येक मंत्र अपने संदर्भ में सर्वश्रेष्ठ है।

1ॐ (प्रणव) — सर्वोच्च

मांडूक्योपनिषद (1.1): 'ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वम्।' — ॐ ही सब कुछ है। यह ब्रह्म का प्रत्यक्ष वाचक है। पतञ्जलि योगसूत्र (1.27-28): 'तस्य वाचकः प्रणवः। तज्जपस्तदर्थभावनम्।' — ॐ का जप और अर्थ-भावना ईश्वर के साथ एकता प्रदान करती है।

2गायत्री मंत्र

ऋग्वेद (3.62.10): 'तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।' — बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि के लिए श्रेष्ठ।

3महामृत्युंजय मंत्र

ऋग्वेद (7.59.12): 'त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।...' — स्वास्थ्य, दीर्घायु और मृत्यु-भय निवारण के लिए।

4सोऽहम् मंत्र

सोऽहम्' = 'वह (ब्रह्म) मैं हूँ।' श्वास के साथ जप — 'सो' (श्वास लेते हुए) और 'हम्' (श्वास छोड़ते हुए)। निर्गुण ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ।

शास्त्रीय मत: सभी मंत्रों का मूल ॐ है। अपने इष्ट देवता के मंत्र का जप ध्यान में सर्वाधिक फलदायक होता है।

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शास्त्रीय स्रोत
मांडूक्योपनिषद, ऋग्वेद, यजुर्वेद, पतञ्जलि योगसूत्र
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