विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में ध्यान के लिए विभिन्न मंत्रों का वर्णन है। प्रत्येक मंत्र अपने संदर्भ में सर्वश्रेष्ठ है।
1ॐ (प्रणव) — सर्वोच्च
मांडूक्योपनिषद (1.1): 'ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वम्।' — ॐ ही सब कुछ है। यह ब्रह्म का प्रत्यक्ष वाचक है। पतञ्जलि योगसूत्र (1.27-28): 'तस्य वाचकः प्रणवः। तज्जपस्तदर्थभावनम्।' — ॐ का जप और अर्थ-भावना ईश्वर के साथ एकता प्रदान करती है।
2गायत्री मंत्र
ऋग्वेद (3.62.10): 'तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।' — बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि के लिए श्रेष्ठ।
3महामृत्युंजय मंत्र
ऋग्वेद (7.59.12): 'त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।...' — स्वास्थ्य, दीर्घायु और मृत्यु-भय निवारण के लिए।
4सोऽहम् मंत्र
सोऽहम्' = 'वह (ब्रह्म) मैं हूँ।' श्वास के साथ जप — 'सो' (श्वास लेते हुए) और 'हम्' (श्वास छोड़ते हुए)। निर्गुण ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ।
शास्त्रीय मत: सभी मंत्रों का मूल ॐ है। अपने इष्ट देवता के मंत्र का जप ध्यान में सर्वाधिक फलदायक होता है।





