विस्तृत उत्तर
ध्यान से मन की शक्ति वृद्धि का वर्णन पतञ्जलि योगसूत्र में विज्ञान-सम्मत रूप में मिलता है।
पतञ्जलि योगसूत्र (3.4-5): 'त्रयमेकत्र संयमः। तज्जयात् प्रज्ञालोकः।' — धारणा + ध्यान + समाधि = संयम। संयम से प्रज्ञा का प्रकाश मिलता है।
मन-शक्ति वृद्धि के पाँच स्तर
1एकाग्रता
ध्यान से बिखरी हुई मानसिक शक्तियाँ एकत्र होती हैं — जैसे बिखरे सूर्य-प्रकाश को लेंस से केंद्रित करने पर आग लगती है।
2स्मृति-शक्ति
योगसूत्र (3.16): संयम से अतीत, वर्तमान और भविष्य का ज्ञान — असाधारण स्मृति-शक्ति।
3संकल्प-बल
योग वशिष्ठ: 'मनःसंकल्पात् जगत् निर्मितम्।' — मन के संकल्प से जगत बना है। ध्यानी का संकल्प-बल असाधारण होता है।
4विवेक-शक्ति
विवेकचूडामणि: ध्यान से अंतःकरण शुद्ध → विवेक-शक्ति जागृत → सत्य-असत्य का भेद स्पष्ट।
5मनोजय
भागवत पुराण: ध्यानी का मन इच्छानुसार केंद्रित — यही सर्वोच्च मन-शक्ति।





