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ध्यान📜 नारद भक्ति सूत्र, भागवत पुराण, रामचरितमानस2 मिनट पठन

ध्यान के दौरान कौन सा भजन गाना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

ध्यान भजन: भागवत (11.5.36) — कलियुग में हरि-कीर्तन = ध्यान का फल। उचित: ॐकार गान, विष्णु सहस्रनाम, महामृत्युंजय, हनुमान चालीसा। क्रम — कीर्तन → भजन (धीमा) → मौन ध्यान। इष्टदेव के भजन सर्वश्रेष्ठ।

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विस्तृत उत्तर

भजन और ध्यान का संबंध भक्ति मार्ग में 'नामसंकीर्तन' के माध्यम से है।

शास्त्रीय आधार

भागवत पुराण (11.5.36): 'कृते यद् ध्यायतो विष्णुं त्रेतायां यजतो मखैः। द्वापरे परिचर्यायां कलौ तद्धरिकीर्तनात्।' — जो फल सतयुग में ध्यान से, त्रेता में यज्ञ से, द्वापर में पूजा से मिलता था, वही कलियुग में भजन-कीर्तन से मिलता है।

ध्यान के अनुकूल भजन-प्रकार

  1. 1ॐकार गान — शांत, एकाग्र मन के लिए सर्वश्रेष्ठ
  2. 2विष्णु सहस्रनाम — विष्णु-ध्यान के साथ
  3. 3महामृत्युंजय जप — शिव-ध्यान के साथ
  4. 4हनुमान चालीसा — शक्ति और भक्ति के लिए
  5. 5सूर के पद, मीराबाई के भजन — प्रेम-भक्ति के लिए

महत्त्वपूर्ण सिद्धांत

  • भजन धीमे, शांत स्वर में — ध्यानावस्था बनाए
  • उच्च स्वर वाला कीर्तन — ध्यान के पूर्व मन को एकाग्र करने के लिए
  • भजन के बाद मौन ध्यान — सर्वोत्तम क्रम

नारद भक्ति सूत्र (37): 'लोकेऽपि भगवद्गुणश्रवणकीर्तनम्।' — जगत में भी भगवान के गुणों का श्रवण-कीर्तन भक्ति का मार्ग है।

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शास्त्रीय स्रोत
नारद भक्ति सूत्र, भागवत पुराण, रामचरितमानस
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