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वैदिक कर्मकांड📜 पारस्कर गृह्यसूत्र, मनुस्मृति, धर्मसिंधु2 मिनट पठन

जनेऊ बदलते समय कौन सा मंत्र बोलें?

संक्षिप्त उत्तर

जनेऊ मंत्र: 'यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।' विधि: स्नान→मंत्र→नया धारण→पुराना निकालें→पीपल/नदी। श्रावण पूर्णिमा=वार्षिक बदलाव।

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विस्तृत उत्तर

जनेऊ (यज्ञोपवीत) बदलते समय विशिष्ट मंत्र का उच्चारण आवश्यक है:

यज्ञोपवीत धारण मंत्र

यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।'

अर्थ: यज्ञोपवीत परम पवित्र है, प्रजापति (ब्रह्मा) से उत्पन्न, आयु बढ़ाने वाला, शुभ्र (शुद्ध)। इसे धारण करता हूँ — मुझे बल और तेज प्रदान हो।

बदलने की विधि

  1. 1स्नान करें, शुद्ध वस्त्र धारण।
  2. 2नया जनेऊ लें, गंगाजल से शुद्ध करें।
  3. 3उपरोक्त मंत्र बोलते हुए नया जनेऊ बाएँ कंधे से दाहिनी ओर (सव्य — उपवीती) धारण करें।
  4. 4पुरानी जनेऊ निकालें।
  5. 5पुरानी जनेऊ को पीपल/बरगद वृक्ष पर बाँधें या नदी में विसर्जित करें।

जनेऊ कब बदलें

  • प्रति वर्ष श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) = नवीन जनेऊ धारण दिवस।
  • सूतक लगने पर (जन्म/मृत्यु)।
  • जनेऊ टूट जाए/गंदी हो जाए।
  • श्राद्ध/तर्पण करते समय (अपसव्य करके, पुनः सव्य)।

नियम: जनेऊ धारण करते समय मौन रहें। जनेऊ = तीन सूत्र = ब्रह्मा-विष्णु-महेश / ऋग्-यजुः-साम / इड़ा-पिंगला-सुषुम्ना। विवाहित = छह सूत्र (दो जनेऊ)।

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शास्त्रीय स्रोत
पारस्कर गृह्यसूत्र, मनुस्मृति, धर्मसिंधु
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