विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह के बाद हवन गृहस्थ श्रोता के लिये बताया गया है। यदि श्रोता गृहस्थ हो, तो कर्म की शांति के लिये हवन करे। हवन में दशम स्कंध का एक-एक श्लोक पढ़कर विधिपूर्वक आहुति देनी चाहिए। सामग्री के रूप में खीर, मधु, घृत, तिल और अन्न आदि का उल्लेख है। एक दूसरा विकल्प भी दिया गया है: एकाग्र चित्त से गायत्री मंत्र द्वारा हवन किया जा सकता है, क्योंकि तत्वतः यह महापुराण गायत्रीस्वरूप है। इससे पता चलता है कि हवन केवल बाहरी कर्म नहीं, बल्कि भागवत के श्लोक, दशम स्कंध, गायत्री और गृहस्थ की कर्म-शांति से जुड़ा हुआ समापन अनुष्ठान है।
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